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50 करोड़ का भ्रष्टाचार कांड! पूर्व थानाध्यक्ष अभिषेक कुमार रंजन पर EOU का शिकंजा, माफिया नेटवर्क से गहरे संबंध का खुलासा

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किशनगंज के पूर्व थानाध्यक्ष अभिषेक कुमार रंजन पर 50 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति और माफिया नेटवर्क से संबंध के गंभीर आरोप लगे हैं। EOU ने पूछताछ की प्रक्रिया शुरू कर दी है और जांच तेजी से आगे बढ़ रही है।

किशनगंज/आलम की खबर:बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी अभियान के बीच आर्थिक अपराध इकाई (आर्थिक अपराध इकाई) ने एक बार फिर बड़े स्तर पर जांच की तैयारी तेज कर दी है। इस बार मामला किशनगंज के पूर्व नगर थानाध्यक्ष अभिषेक कुमार रंजन से जुड़ा है, जिन पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने और एक कथित संगठित अवैध नेटवर्क से जुड़े होने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों ने पुलिस विभाग और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है।

जांच के घेरे में 50 करोड़ की कथित संपत्ति

सूत्रों के अनुसार, EOU की प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिले हैं कि अभिषेक कुमार रंजन ने अपने सेवा काल के दौरान लगभग 50 करोड़ रुपये की संपत्ति अर्जित की है। यह संपत्ति केवल बिहार तक सीमित नहीं है, बल्कि पश्चिम बंगाल, दिल्ली-एनसीआर और अन्य राज्यों तक फैली हुई बताई जा रही है। जांच एजेंसियों को सिलीगुड़ी क्षेत्र में एक फ्लैट, दार्जिलिंग रोड के पास जमीन और कुछ अन्य निवेशों के दस्तावेज भी मिले हैं, जिनकी फंडिंग को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि इतनी बड़ी संपत्ति का स्रोत क्या था और क्या इसमें अवैध कमाई या भ्रष्टाचार से अर्जित धन का उपयोग किया गया है।

पूछताछ की तैयारी, नोटिस जारी करने की प्रक्रिया

EOU ने पूर्व थानाध्यक्ष को पूछताछ के लिए पटना मुख्यालय बुलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। माना जा रहा है कि उन्हें अगले सप्ताह सोमवार को तलब किया जा सकता है। पूछताछ के दौरान उनके बैंक लेनदेन, संपत्ति खरीद, निवेश और संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे जाएंगे।

जांच एजेंसी उन्हें अपने बचाव में दस्तावेज प्रस्तुत करने का पूरा अवसर देगी, लेकिन इसके साथ ही हर वित्तीय लेनदेन की गहराई से जांच की जाएगी।

ससुराल तक पहुंची जांच टीम

सूत्रों के मुताबिक, जांच के सिलसिले में ईओयू की टीम पश्चिम चंपारण के सिकटा स्थित उनके ससुराल भी पहुंची थी। हालांकि, पहले से जानकारी लीक होने के कारण वहां से कोई बड़ी बरामदगी नहीं हो सकी। इसके बावजूद टीम ने डिजिटल रिकॉर्ड और पारिवारिक संपत्तियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण संकेत जुटाए हैं।

जांच अब केवल कागजी दस्तावेजों तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल ट्रांजेक्शन और बेनामी संपत्तियों की परतें भी खंगाली जा रही हैं।

गौतम कुमार केस से खुला कनेक्शन

इस पूरे मामले में नया मोड़ तब आया जब निलंबित एसडीपीओ गौतम कुमार के खिलाफ चल रही आय से अधिक संपत्ति की जांच में अभिषेक कुमार रंजन का नाम सामने आया। जांच एजेंसियों के अनुसार, दोनों अधिकारियों के बीच गहरे संबंध थे और उन्हें एक-दूसरे का “राजदार” माना जा रहा था।

EOU को शक है कि दोनों ने मिलकर एक संगठित तरीके से अवैध कमाई का नेटवर्क खड़ा किया था, जिसमें कई स्तरों पर माफिया और स्थानीय कारोबारी शामिल थे।

माफिया नेटवर्क से जुड़े होने के आरोप

जांच में यह भी सामने आया है कि अभिषेक कुमार रंजन के बालू माफिया, शराब माफिया, एंट्री माफिया और अन्य अवैध कारोबारियों से करीबी संबंध थे। आरोप है कि इन अवैध गतिविधियों को संरक्षण देने के बदले उन्हें नियमित रूप से भारी कमीशन मिलता था।

इस कथित अवैध आय को बाद में जमीन, मकान और अन्य निवेशों में लगाया गया, जिससे नामी और बेनामी संपत्तियों का एक बड़ा जाल तैयार हो गया।

डिजिटल जांच और वित्तीय ट्रेल की पड़ताल

EOU की टीम अब पूरे मामले में डिजिटल साक्ष्यों पर फोकस कर रही है। बैंक ट्रांजेक्शन, प्रॉपर्टी डील्स, मोबाइल डेटा और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की बारीकी से जांच की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि इससे पूरे नेटवर्क की असली परतें सामने आ सकती हैं।

पुलिस विभाग में हलचल

इस मामले के सामने आने के बाद पुलिस विभाग में भी हड़कंप मच गया है। लगातार सामने आ रहे आय से अधिक संपत्ति के मामलों ने विभाग की छवि पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आंतरिक स्तर पर भी कई अधिकारियों की गतिविधियों की समीक्षा शुरू हो गई है।

EOU का सख्त रुख

EOU का साफ कहना है कि यह मामला किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि एक बड़े नेटवर्क की ओर इशारा करता है। एजेंसी ने संकेत दिए हैं कि जांच में शामिल हर व्यक्ति पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

आगे क्या होगा

अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि पूछताछ के दौरान क्या नए खुलासे सामने आते हैं। माना जा रहा है कि अगर वित्तीय लेनदेन और माफिया कनेक्शन साबित होते हैं, तो यह मामला बिहार के सबसे बड़े भ्रष्टाचार मामलों में से एक बन सकता है।

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